Some Important Life Lessons from Lord Shiva That Everyone Should Learn

Lord Shiva – the supreme god in Hinduism is known to us by many names, he has 108 different avatars with different names. He is the ultimate – the creator and the destroyer of the universe. Multi-faceted, lord Shiva is the giver of wisdom. Here are 10 very important life lessons from Lord Shiva that everyone show learn

1. Never Ever Tolerate Evil

Lord Shiva never tolerated injustice.He is the destroyer of all evil things. He was fair even when destroying the rakshasas according to the Hindu texts. We should work towards zero-tolerance of evil around us and take a firm stand against injustice.

2. Exercise Self-Control

When in control, everything falls into place. Self-control is the key to a great life. It keeps one focused, aligned and determined.

3. Anger is never the answer

Lord Shiva is Maha Yogi as he meditated for hours and it was through his cool intellect the well-being of our universe severely depend on. Only extremities disturbed his mind and resulted in rage. Therefore, when fighting life’s battles, anger is never the answer. It will force you to do the extreme which achieves nothing. Being cool and calm will help you get a new perspective and win over your battles.


4. Happiness does not equal to materialism

If you have nothing it doesn’t mean you are missing out in life. Being attached to wealth or assets only leads to being tied down – physically, mentally and emotionally.


5. Take it in your stride

No matter what comes our way, we need to be prepared and take it in our stride.

6. Your Obsession will be your downfall

According to ancient Hindu text, Ramayana, Ravana’s obsession over Sita led to his end. Therefore, your obsession will lead to nothing but your own destruction. Lord Shiva never obsessed over anything and was free from all desires.

7. Nothing lasts forever

We human beings have a tendency to hoard things – possessions, people, relationships and, of course, feelings. But everything has a shelf-life and nothing will last forever. We need to learn to move on and be ready to face whatever comes our way.


8. Research will fetch new avenues

Always research before you start something new. Ganga Ma, encased in Lord Shiva’s hair represents the end of ignorance. She embodies unfathomable knowledge. Denial doesn’t help anyone and therefore, it is important to gather information before you plan to start anything new.


9. Respect your spouse/partner

Lord Shiva is also known as Ardhanarishwar, i.e. half man and half woman, and therefore, His wife, Mata Parvati was an essential part of him. He always treated her with the utmost respect. She was his Shakti and Shiva can never be apart from strength. Therefore, our spouse – wives or husbands, partners in life, are truly our better halves and we need to treat them with absolute respect and love.


10. Ego has no place in your life

A person’s ego is the biggest cause of all obstacles. Ego has ruined many goals, relationships, ideas, and dreams. It makes one bitter and aloof. Lord Shiva carried the Trishul to keep his ego in check. He never let his emotions get the better of himself. Similarly, he did not tolerate anyone’s ego either.
U.jpg

भगवान शिव की पीठ है केदारनाथ, जानें बाकी 4 अंग कहां हैं स्थापित

उत्तराखंड का हिन्दू संस्कृति और धर्म में महत्वपूर्ण स्थान है। यहां गंगोत्री, यमुनोत्री, बद्रीनाथ जैसे कई सिद्ध तीर्थ स्थल हैं। सारी दुनिया में भगवान शिव के करोड़ों मंदिर हैं परन्तु उत्तराखंड स्थित पंच केदार सर्वोपरि हैं। भगवान शिव ने अपने महिषरूप अवतार में पांच अंग, पांच अलग-अलग स्थानों पर स्थापित किए थे। जिन्हें मुख्य केदारनाथ पीठ के अतिरिक्त चार और पीठों सहित पंच केदार कहा जाता है।
आइए अब जानते है भगवान शिव के पंच केदारों के बारे में-

1.केदारनाथ1_kedarnath-temple

यह मुख्य केदारपीठ है। इसे पंच केदार में से प्रथम कहा जाता है। पुराणों के अनुसार, महाभारत का युद्ध खत्म होने पर अपने ही कुल के लोगों का वध करने के पापों का प्रायश्चित करने के लिए वेदव्यास जी की आज्ञा से पांडवों ने यहीं पर भगवान शिव की उपासना की थी। तब भगवान शिव ने उनकी तपस्या से खुश होकर महिष अर्थात बैल रूप में दर्शन दिये थे और उन्हें पापों से मुक्त किया था। तब से महिषरूपधारी भगवान शिव का पृष्ठभाग यहां शिलारूप में स्थित है।

2.मध्यमेश्वर-

2_madhyamaheshwar-temple

इन्हें मनमहेश्वर या मदनमहेश्वर भी कहा जाता हैं। इन्हें पंच केदार में दूसरा माना जाता है। यह ऊषीमठ से 18 मील दूरी पर है। यहां महिषरूपधारी भगवान शिव की नाभि लिंग रूप में स्थित है। पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान शिव ने अपनी मधुचंद्र रात्रि यही पर मनाई थी। यहां के जल की कुछ बूंदे ही मोक्ष के लिए पर्याप्त मानी जाती है।

3.तुंगनाथ-tungnath-temple

इसे पंच केदार का तीसरा माना जाता हैं। केदारनाथ के बद्रीनाथ जाते समय रास्ते में यह क्षेत्र पड़ता है। यहां पर भगवान शिव की भुजा शिला रूप में स्थित है। कहा जाता है कि इस मंदिर का निर्माण भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए स्वयं पांडवों ने करवाया था। तुंगनाथ शिखर की चढ़ाई उत्तराखंड की यात्रा की सबसे ऊंची चढ़ाई मानी जाती है।


4.
रुद्रनाथ-

4__rudranathtemple

 
यह पंच केदार में चौथे हैं। यहां पर महिषरूपधारी भगवान शिव का मुख स्थित हैं। तुंगनाथ से रुद्रनाथ-शिखर दिखाई देता है पर यह एक गुफा में स्थित होने के कारण यहां पहुंचने का मार्ग बेदह दुर्गम है। यहां पंहुचने का एक रास्ता हेलंग (कुम्हारचट्टी) से भी होकर जाता है।

 

5.कल्पेश्वर-5__kalpeshwar-temple

यह पंच केदार का पांचवा क्षेत्र कहा जाता है। यहां पर महिषरूपधारी भगवान शिव की जटाओं की पूजा की जाती है। अलखनन्दा पुल से 6 मील पार जाने पर यह स्थान आता है। इस स्थान को उसगम के नाम से भी जाना जाता है। यहां के गर्भगृह का रास्ता एक प्राकृतिक गुफा से होकर जाता है।

निर्जला एकादशी व्रत की महिमा!!!

हिंदू धर्म में एकादशी के व्रत को महत्वपूर्ण माना गया है। वैसे तो प्रत्येक वर्ष चौबीस एकादशियां होती हैं। जब अधिकमास या मलमास आता है तब इनकी संख्या बढ़कर 26 हो जाती हैं। ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को निर्जला एकादशी कहते हैं। निर्जला एकादशी को सबसे पुण्यदायिनी माना गया है। इस दिन बिना अन्न-जल ग्रहण किए व्रत करने का विधान है।
ekadashi

इस एकादशी पर बिना जल के रहकर उपवास करना होता है, इसी वजह से इस एकादशी का नाम निर्जला एकादशी पड़ा है। कहते हैं यह व्रत काफी कठिन और सभी इच्छाओं को पूर्ण करने वाला माना गया है।

कहते हैं इस दिन सुबह उठकर दांतों को साफ करने के लिए ब्रश-पेस्ट की जगह दातून का इस्तेमाल करना चाहिए। नित्य कर्मों से निवृत्त होकर भगवान विष्णु की मन से पूजा-अर्चना करें। भगवान विष्णु को तुलसी दल अर्पित करें। चूंकि, इस दिन तुलसी तोड़ना सही नहीं माना जाता, इसलिए आप एक दिन पहले ही सूर्य डूबने से पहले 108 दल तोड़कर रख लें और एकादशी के दिन यह भगवान पर चढ़ाएं।

मन में किसी के लिए भी क्लेश न आने दें और अपने मन को पवित्र रखने की भरसक कोशिश करें। रात्रि में भगवान की पूजा-अर्चना के बाद ही सोएं। सुबह उठकर सर्वप्रथम नित्य क्रिया से निवृत्त होकर भगवान की पूजा-अर्चना करें। इसके बाद शर्बत से भरे बर्तन, मिश्री और खरबूजा, आम, पंखा, मिष्ठान्न आदि चीजों का दान करना चाहिए।

दान के बाद मुंह में सर्वप्रथम तुलसी का दल लेकर फिर पानी पीएं और इसके बाद भोजन करना चाहिए। कहते हैं विधि-विधान के अनुसार जो यह व्रत करता है उसे साल भर के एकादशी जितना पुण्य मिल जाता है। यह व्रत अक्षय पुण्य देने वाला और सभी इच्छाओं की पूर्ति करता है यह।

निर्जला एकादशी के पीछे महाभारत से जुड़ी एक कहानी प्रचलित है। बात उन दिनों की है, जब ऋषि वेदव्यास अपने आश्रम में पांडवों को शिक्षा-दीक्षा दे रहे थे। एक दिन मुनिवर एकादशी व्रत का संकल्प करा रहे थे। पांडव उनकी बातों को ध्यान से सुन रहे थे, लेकिन…

इन बातों में भीम का मन नहीं लग रहा था। आखिरकार, इन बातों पर अपनी उदासी जताते हुए उन्होंने ऋषि से कहा कि एक माह में दो एकादशी आती है औऱ मैं दो दिन तो क्या एक समय भी बिना भोजन ग्रहण किए रह ही नहीं सकता। तो बताएं मुनिवर कि क्या एकादशी के पुण्य से वंचित रह जाऊंगा।

भीम के इस सवाल पर वेदव्यास जी ने कहा, कि सिर्फ एक उपाय है। साल भर में सिर्फ एक एकादशी है जो बाकी सारे एकादशी व्रत के समतुल्य है। यह ज्येष्ठ मास की निर्जला एकादशी है। इसे करने से उतना ही पुण्य प्राप्त होता है, जितना की इन 24 एकादशियों को करने से प्राप्त होता है। भीम को यह उपाय अच्छा लगा और इसलिए भी इसे पांडव एकादशी या भोमसेनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है।

+919811304305

www.gangajal.com 

office@gangajal.com/info@gangajal.com

skype @ Gangajal –The Holy Water

www.facebook.com/gangajalgangotri

Ganga Dussehra 2016 – June 14 (Tuesday)

Ganga-Dussehra

Ganga is observed as a divine river in not only India but also amongst the most sacred rivers across the world. This truth is universal and is believed by all Indians and also by famous scholars of the world. River. It is worshiped like a Goddess and it is believed that it was the tenth day of Jyeshta bright half when she was descended on earth from heaven. The day is celebrated as Ganga Dussehra. On this day, after a lot of hard work and penance of Bhagirath, a Suryavanshi king, got success to bring down the river to earth. Since then, every year the occasion of Ganga Dussehra is celebrated by performing several rites and rituals of Ganga pooja to commemorate her.

The Significance of Ganga Dussehra (गंगा दशहरा का महत्व)

When river Ganga incarnated on earth that occasion was obliged with rare ten vedic astrologic calculations. Jyeshtha month, Shukla Paksha (bright half), Tenth date, Wednesday, Hasta Nakshatra, Vyatipata yoga, Gar Anand Yog and Moon in Virgo and Sun in Tauras, these all ten Yogas absorb all the ten sins by merely take a bath in river Ganga on Ganga Dussehra.

Those all ten sins in which among three are organic, four verbal and other three are mental are proclaimed. Organic means sins conducted by heavenly body and these are, 1. Fetch anything from others forcibly, 2. Violence, 3. Contact with other woman. Among four types of verbal sins are, 1. Speak harsh words, 2. Tell a lie, 3. Complain for others and 4. Irrelevant rambling are included. To occupy others’ assets, desire to harm others and discussions on irrelevant topics are considered as the top most mental sins. As far as possible one should avoid involving in all these activities as these are considered as the biggest sins in our mythology but still if occur mistakenly then can demolish by just take a holy dip and perform pooja in Ganga on Ganga Dussehra.

Ganga Dussehra Rituals (गंगा दशहरा अनुष्ठान)

If it is not possible to take bath in Ganga on Ganga Dussehra pray at some other river or reservoir or with pure water at home as per the convenience. After that should do recital pooja in front of idol of Ganga. The idol of Ganga is considered as Trinetr, quadrilateral, adorned with white clothes and white lotus. King Bhagirath and Himalaya should also be worshipped which is highly recommended during Ganga pooja. Lord Shiva is the prime deity to be worship during the Ganga Pooja as he is sole owner and holder of river Ganga and by grace of his mercy only sent the river on earth for the welfare of mankind. The donation of ten eatable items mainly fruits and black sesame seeds are considered most auspicious.

Om Tatpurushaay Vidmahe Mahadevaay Deemahi Tanno Rudrah Prachodayat..

a
Lord Shiva is the deity of Shiva Mantra. Shiva literally means “the One who is eternally pure” or “the One who not affected by three Gunas of Prakrti (Sattva, Rajas, and Tamas)’.
The word ‘Shiva’ means auspiciousness and perfection. Shiva is the power behind all the mantras. Shiva is the lord of ‘Immortality‘; He is the One who has conquered Death. The very utterance of his name rejuvenates the mind, body and soul. Shiva Mantras have tremendous healing powers. Shiva Mantras have the power to fulfill one’s desire and can be also used for attainment of the ultimate liberation – Moksha.

We are the Uttarkashi Minerals Corporation, is the only company duly licensed, approved and authorized by Uttarakhand Government, to pack the holy Gangajal in its purest form. From drawing of Gangajal from the sacred river Ganges till packing, Gangajal is kept untouched from human hands. Gangajal is not treated chemically in the entire packing process, so that its sanctity is not spoilt.

 Our motto is to retain our civilization and culture alive, that’s why we are dedicated to provide Gangajal –The holy water to your door step, all over the world…

 +919811304305

www.gangajal.com 

office@gangajal.com/info@gangajal.com

skype @ Gangajal –The Holy Water

www.facebook.com/gangajalgangotri

Narasimha Jayanthi 2016

Narasimha is the fourth incarnation of Lord Vishnu and is popularly known as ‘man-lion’ or ‘half man – half lion’ incarnation. In 2016, the date of Narasimha Jayanthi is May 20. The main aim of the Narasimha incarnation was to end the tyranny of Hiranyakashipu and restore the path of Dharma. Prahlada the young son of Hiranyakashipu and an ardent devotee of Lord Vishnu paved the way for the removal of Adharma.

narasimha jayanti.jpgNarasimha Jayanti is observed on the 14th day of the Shukla Paksha (waxing phase of moon) in Vaisakha month (April – May). It is believed that Lord Vishnu appeared in the form of Narasimha on the day to destroy demon Hiranyakashipu.

We are the Uttarkashi Minerals Corporation, is the only company duly licensed, approved and authorized by Uttarakhand Government, to pack the holy Gangajal in its purest form. From drawing of Gangajal from the sacred river Ganges till packing, Gangajal is kept untouched from human hands. Gangajal is not treated chemically in the entire packing process, so that its sanctity is not spoilt.

 Our motto is to retain our civilization and culture alive, that’s why we are dedicated to provide Gangajal –The holy water to your door step, all over the world…

 +919811304305

www.gangajal.com 

office@gangajal.com/info@gangajal.com

skype @ Gangajal –The Holy Water

www.facebook.com/gangajalgangotri

Today’s Hindu Calendar – May 17, 2016-Shukla Paksha Ekadasi Tithi

Tithi in Hindu Calendar on Tuesday, May 17, 2016 (Today) –
Shukla Paksha Ekadasi Tithi or the eleventh day during the waxing phase of moon in Hindu calendar and Panchang in most regions. It is Shukla Paksha Ekadasi Tithi or the eleventh day during the waxing phase of moon till 5:57 PM on May 17. Then onward it is Shukla Paksha Dwadasi Tithi or the twelfth day during the waxing phase of moon. All time based on India Standard Time.
add41

+919811304305

www.gangajal.com

office@gangajal.com/info@gangajal.com

skype @ Gangajal –The Holy Water

www.facebook.com/gangajalgangotri

Mother Goddess Represents Which among Five Elements in Panchayatana form of Worship

Panchayatana form of worship introduced by Adi Shankaracharya has assigned one element to one of the five deities in Hinduism. Mother Goddess (Shakti or Devi or Bhagavati) is the embodiment of Agni Mahabhuta (fire) among the five elements.

The five elements are ether/space, air, fire, water and earth. The five deities in Panchayatana form of worship are Vishnu, Mother Goddess, Ganesha, Surya and Shiva.

In this concept, the five deities are worshipped in the form of sacred stones found in five holy rivers.

Mother Goddess, the embodiment of Agni Mahabhuta, is worshipped in the form of swarnamukhi stone or rekha shila found in Godavari River in Andhra Pradesh.

We are the Uttarkashi Minerals Corporation, is the only company duly licensed, approved and authorized by Uttarakhand Government, to pack the holy Gangajal in its purest form. From drawing of Gangajal from the sacred river Ganges till packing, Gangajal is kept untouched from human hands. Gangajal is not treated chemically in the entire packing process, so that its sanctity is not spoilt.

 Our motto is to retain our civilization and culture alive, that’s why we are dedicated to provide Gangajal –The holy water to your door step, all over the world…

 profile_pic+919811304305

www.gangajal.com 

office@gangajal.com/info@gangajal.com

skype @ Gangajal –The Holy Water

www.facebook.com/gangajalgangotri

🏾अक्षय तृतीया!!!

  • 🏾अक्षय तृतीया पर्व वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि के दिन मनाया जाता है। 🏾इस वर्ष यह पर्व 9 मई 2016 के दिन मनाया जाएगा।
  • 🏾वैदिक कलैण्डर के चार सर्वाधिक शुभ दिनों में से यह एक मानी गई है। ‘अक्षय’ से तात्पर्य है ‘जिसका कभी क्षय न हो’ अर्थात जो कभी नष्ट नहीं होता
  • 🏾अक्षय तृतीया को भगवान विष्णु ने परशुराम अवतार लिया था।
  • 🏾हिन्दू धर्म की मान्यताओं के अनुसार यह दिन सौभाग्य और सफलता का सूचक है। 🏾इस दिन को ‘सर्वसिद्धि मुहूर्त दिन’ भी कहते है, क्योंकि इस दिन शुभ काम के लिये पंचांग देखने की ज़रूरत नहीं होती।
  • 🏾नर नारायण ने भी इसी दिन अवतार लिया था।
  • प्रसिद्ध तीर्थस्थल बद्रीनारायण के कपाट भी इसी तिथि से ही पुनः खुलते हैं।
  • वृन्दावन स्थित श्री बांके बिहारी जी के मन्दिर में भी केवल इसी दिन श्री विग्रह के चरण दर्शन होते हैं, अन्यथा वे पूरे वर्ष वस्त्रों से ढके रहते हैं।
  • 🏾’अक्षय तृतीया’ के दिन ख़रीदे गये वेशक़ीमती आभूषण एवं सामान शाश्वत समृद्धि के प्रतीक हैं। 🏾इस दिन शुरू किये गए किसी भी नये काम या किसी भी काम में लगायी गई पूँजी में सदा सफलता मिलती है और वह फलता-फूलता है।
  • यह माना जाता है कि इस दिन ख़रीदा गया सोना कभी समाप्त नहीं होता, क्योंकि भगवान विष्णु एवं माता लक्ष्मी स्वयं उसकी रक्षा करते हैं।
  • 🏾इस दिन को ‘नवन्न पर्व’ भी कहते हैं। इस दिन बरतन, पात्र, मिष्ठान, तरबूज़ा, ख़रबूज़ा, दूध, दही, चावल का दान देना चाहिए।
  • 🏾इस तिथि में शीतल जल, कलश, चावल, चना, दूध, दही आदि खाद्य व पेय पदार्थों सहित वस्त्राभूषणों का दान अक्षय व अमिट पुण्यकारी माना गया है।
  • तृतीया तिथि माँ गौरी की तिथि है, जो बल-बुद्धि वर्धक मानी गई हैं।
  • गृहप्रवेश करने के लिए भी आज का दिन सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।
  • अक्षय तृतीया पर अपने अच्छे आचरण और सद्गुणों से दूसरों का आशीर्वाद लेना अक्षय रहता है।
  • 🏾आज के दिन मनुष्य अपने या स्वजनों द्वारा किये गये जाने-अनजाने अपराधों की सच्चे मन से ईश्वर से क्षमा प्रार्थना करे तो भगवान उसके अपराधों को क्षमा कर देते हैं।

    20160409042151+919811304305

    www.gangajal.com 

    office@gangajal.com/info@gangajal.com

    skype @ Gangajal –The Holy Water

    www.facebook.com/gangajalgangotri

क्यों चढ़ता है शिवलिंग पर जल??

हम सब जानते है देवतओं और दानवो ने सागर मंथन किया जिसमे अच्छी और बुरी दोनों चीजे निकली। उसी मंथन में हलाहल नाम का विष भी निकला और उस से समस्त विश्व विनाश की और बढ़ने लगा। किसी में इतनी शक्ति नहीं थी की उस विष के जानलेवा प्रभाव को रोक सके। विश्व को विष से बचाने के लिए।
शिव जी ने विष पी लिया और अपने कंठ में रख लिया। इस से उन का कंठ नीला पड़ने लग गया।

उससे ही महादेव का नाम नीलकंठ पड़ा। परंतु विष के प्रभाव से उनका समस्त शरीर अत्यधिक गरम हो गया।। उस की वजह से आस पास का वातावरण भी जलने लगा।।
सभी देवी देवताओं ने बेल पत्र शिवजी को खिलाना शुरू कर दिया। बेलपत्र विष के प्रभाव को कम करता है साथ में उन पर जल डालना भी शुरू कर दिया ताकि गर्मी का प्रभाव कम होने लगे।

उस के प्रभाव से शिव जी के शरीर की विष से उत्पन्न हुई गरमी शांत होने लगी।।तभी से यहां प्रथा चलती आ रही है।।

पवित्र एवं पावन गंगाजल उचित मुल्य पर घर बेठे प्राप्त ही करने के लिये सम्पर्क् करें।

20160409042151
+919811304305

www.gangajal.com 

skype @ Gangajal –The Holy Water

www.facebook.com/gangajalgangotri

www.twitter.com/HolyGangajal