क्यों पवित्र है गंगा?असंख्य अस्थि विसर्जनो के बाद भी – जाने वैज्ञानिक और पौराणिक कारण…

हिन्दू सनातन धर्म में माँ गंगा नदी की महिमा को कौन नही जानता | यह देव नदी हरि के चरणों से निकली हुई है और अब भगवान शिव की जटाओ में बसी हुई है | कई सालो की घोर तपस्या करके भागीरथ ने इसे धरती पर बुलवाया और सागर के पुत्रो को मोक्ष दिलवाया|

तब से यह मान्यता हो गयी की इसमे स्नान करने से मनुष्य के सभी पाप खत्म हो जाते है | हिन्दुओ की इस नदी में अपार आस्था है | मरते समय यदि किसी के मुँह में गंगा जल डाला जाये तो उसके प्राण आसानी से निकलते है और मोक्ष की प्राप्ति होती है | इसके अलावा मृत्यु के बाद मरने वाली की अस्थियो को गंगा में विसर्जित किया जाना भी आत्मा की शांति के लिए परम माना जाता है|

आज तक यह बात पहेली बना हुआ है की इस चमत्कारी नदी में असंख्य मात्रा में अस्थियों का विसर्जन होने के बाद भी यह नदी पवित्र कैसे है |

वैज्ञानिको ने जब इस नदी के जल पर शोध किया तो पाया की इस नदी में पारा धातु की मात्रा अधिक है हो हड्डियों में विद्यमान कैल्सियम और फोस्फोरस को जल में विलीन कर देती है | अत: जल दूषित नही हो पाता|

गंगा नदी का पवित्र जल जिसकी कीर्ति हमारे धर्मग्रंथो में बताई गयी है | यह मोक्षदायिनी जल कहलाता है | ऐसी मान्यता है की मरते हुए व्यक्ति के मुख में यह डाल दे तो उसे मोक्ष प्राप्त होता है|धार्मिक कार्यो में इस शुद्ध जल की जरुरत पड़ती है|

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क्यों है शिव को सावन (श्रावण) मास प्रिय ?

1) समुद्र-मंथन के समय जब हालाहल नामक विष सागर से निकला था। उस समय सृष्टि की रक्षा के लिए भगवान शिव ने इस विष को अपने गले में धारण कर लिया। यह घटना सावन के महीने में ही हुई थी | विष के ताप को शांत करने के लिए ब्रह्मा जी के कहने पर देवताओं ने शिव जी का जलाभिषेक किया और जड़ी बूटियों का भोग लगाया। इससे शिव जी का ताप शांत हुआ, इसके बाद से ही भगवान शिव का जलाभिषेक किया जाने लगा इस अद्भुत घटना के कारण शिव को सावन अति प्रिय है और सावन में जलाभिषेक का अद्भुत फल मिलता है |

2) शास्त्रों के अनुसार सावन मास से ठीक पहलेदेवशयनी एकादशी वाले दिन भगवान विष्णुयोगनिद्रा में चले जाते हैं। इसके बाद सृष्टि के संचालन का उत्तरदायित्व भगवान शिव ग्रहण करते हैं। इसलिए सावन के प्रधान देवता भगवान शिव बन जाते हैं। यही कारण है कि सावन में अन्य किसी भी देवता की पूजा से शिव की पूजा का कई गुणा फल प्राप्त होता है। इसलिए माना जाता है कि भगवान शिव को सावन सबसे अधिक प्रिय है।

3) शास्त्रों और पुराणों के अनुसार भगवान शिव का सावन मास प्रिय होने का एक कारण यह भी है कि, माता सती के देहत्याग करने के बाद जब आदिशक्ति ने पार्वती के रुप में जन्म लिया तो इसी महीने में तपस्या करके भगवान शिव को पति रुप में पाने का वरदान प्राप्त किया। यानी भगवान शिव और पार्वती का मिलन इसी महीने में हुआ था। इसलिए यह महीना भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है।

4) इसी पवित्र सावन मास में भगवान शिव ने माता पार्वती को सर्वप्रथम राम-कथा सुनाई थी, सुनने को श्रवण कहते हैं | इसी राम कथा के सुनने और सुनाने (श्रावण) की परिपाटी में इस पवित्र माह को “श्रावण” कहा गया है और विश्व भर के हिन्दू इस माह में सत्य नारायण की कथा और राम चरित मानस का पाठ करते हैं |

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Lingam Puja – How to Worship Shivling at Home? – Rules of Worshiping Shiva Lingam

Shivling or Shiva lingam connects a devotee with the Supreme Being – Lord Shiva. The lingam is the symbol of Lord Shiva and the lingam puja helps the devotee in understanding Lord Shiva. The Lord cannot be described but still we say he is without a beginning and an end and is without a form. It is difficult for a devotee to understand this formless nature. Therefore Lord Shiva appeared in the form of Jyotirlinga before Brahma and Vishnu. The Lingam thus is a symbol of Lord Shiva. Each Lingam puja, step by step, takes the devotee to the eternal truth – that he/she is part of the Supreme Being.

Worshipping Shivling at Home – Rules of Worshiping Shiva Lingam

Before starting the Puja, the devotee takes a bath and wear freshly washed clothes. Hymns praising Lord Shiva or the mantra ‘om namaha shivayaa’ are repeated to create a mood for worship. Then, the devotee sits in front of the lingam and blows conch or ring bells. This indicates the beginning of the Puja.

First it is the panchamrit abhishek – the libation of five holy liquids over the lingam. The libation can consist of any five of the following – water from river Ganga, honey, sugarcane juice, milk, yogurt, ghee, seawater, coconut water or milk, fragrant oils, rose water or other precious liquids. Usually, only milk of cow is used. While pouring the liquid, om namah shivaya is uttered. Some devotees utter the Lord’s name 108 times and some 1008 times. There is no fixed rule.

After the panchamrit abhishek, the lingam is cleaned with water from Ganga. (This is might not be possible always so just normal water.) After this the lingam is smeared with sandalwood paste and is decked with flowers. Water and sandalwood paste is used to keep the lingam cool, as Lord Shiva is always in a highly inflammable state. In some Shiva temples, cooling liquid constantly drops from pot hung above the Lingam.

Next, sweets, coconut and fruits are offered to the Lord. Camphor and incense are lit and ‘aarti’ is conducted. Some devotees fan the lingam and sing praises of the lord.

Finally, ringing of bells or blowing of conch indicates the end of Puja. White ash (vibhuti) is rubbed on the forehead and it is also distributed. Fruits, sweets and coconut are distributed as ‘prasad.’

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Some Important Life Lessons from Lord Shiva That Everyone Should Learn

Lord Shiva – the supreme god in Hinduism is known to us by many names, he has 108 different avatars with different names. He is the ultimate – the creator and the destroyer of the universe. Multi-faceted, lord Shiva is the giver of wisdom. Here are 10 very important life lessons from Lord Shiva that everyone show learn

1. Never Ever Tolerate Evil

Lord Shiva never tolerated injustice.He is the destroyer of all evil things. He was fair even when destroying the rakshasas according to the Hindu texts. We should work towards zero-tolerance of evil around us and take a firm stand against injustice.

2. Exercise Self-Control

When in control, everything falls into place. Self-control is the key to a great life. It keeps one focused, aligned and determined.

3. Anger is never the answer

Lord Shiva is Maha Yogi as he meditated for hours and it was through his cool intellect the well-being of our universe severely depend on. Only extremities disturbed his mind and resulted in rage. Therefore, when fighting life’s battles, anger is never the answer. It will force you to do the extreme which achieves nothing. Being cool and calm will help you get a new perspective and win over your battles.


4. Happiness does not equal to materialism

If you have nothing it doesn’t mean you are missing out in life. Being attached to wealth or assets only leads to being tied down – physically, mentally and emotionally.


5. Take it in your stride

No matter what comes our way, we need to be prepared and take it in our stride.

6. Your Obsession will be your downfall

According to ancient Hindu text, Ramayana, Ravana’s obsession over Sita led to his end. Therefore, your obsession will lead to nothing but your own destruction. Lord Shiva never obsessed over anything and was free from all desires.

7. Nothing lasts forever

We human beings have a tendency to hoard things – possessions, people, relationships and, of course, feelings. But everything has a shelf-life and nothing will last forever. We need to learn to move on and be ready to face whatever comes our way.


8. Research will fetch new avenues

Always research before you start something new. Ganga Ma, encased in Lord Shiva’s hair represents the end of ignorance. She embodies unfathomable knowledge. Denial doesn’t help anyone and therefore, it is important to gather information before you plan to start anything new.


9. Respect your spouse/partner

Lord Shiva is also known as Ardhanarishwar, i.e. half man and half woman, and therefore, His wife, Mata Parvati was an essential part of him. He always treated her with the utmost respect. She was his Shakti and Shiva can never be apart from strength. Therefore, our spouse – wives or husbands, partners in life, are truly our better halves and we need to treat them with absolute respect and love.


10. Ego has no place in your life

A person’s ego is the biggest cause of all obstacles. Ego has ruined many goals, relationships, ideas, and dreams. It makes one bitter and aloof. Lord Shiva carried the Trishul to keep his ego in check. He never let his emotions get the better of himself. Similarly, he did not tolerate anyone’s ego either.
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भगवान शिव की पीठ है केदारनाथ, जानें बाकी 4 अंग कहां हैं स्थापित

उत्तराखंड का हिन्दू संस्कृति और धर्म में महत्वपूर्ण स्थान है। यहां गंगोत्री, यमुनोत्री, बद्रीनाथ जैसे कई सिद्ध तीर्थ स्थल हैं। सारी दुनिया में भगवान शिव के करोड़ों मंदिर हैं परन्तु उत्तराखंड स्थित पंच केदार सर्वोपरि हैं। भगवान शिव ने अपने महिषरूप अवतार में पांच अंग, पांच अलग-अलग स्थानों पर स्थापित किए थे। जिन्हें मुख्य केदारनाथ पीठ के अतिरिक्त चार और पीठों सहित पंच केदार कहा जाता है।
आइए अब जानते है भगवान शिव के पंच केदारों के बारे में-

1.केदारनाथ1_kedarnath-temple

यह मुख्य केदारपीठ है। इसे पंच केदार में से प्रथम कहा जाता है। पुराणों के अनुसार, महाभारत का युद्ध खत्म होने पर अपने ही कुल के लोगों का वध करने के पापों का प्रायश्चित करने के लिए वेदव्यास जी की आज्ञा से पांडवों ने यहीं पर भगवान शिव की उपासना की थी। तब भगवान शिव ने उनकी तपस्या से खुश होकर महिष अर्थात बैल रूप में दर्शन दिये थे और उन्हें पापों से मुक्त किया था। तब से महिषरूपधारी भगवान शिव का पृष्ठभाग यहां शिलारूप में स्थित है।

2.मध्यमेश्वर-

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इन्हें मनमहेश्वर या मदनमहेश्वर भी कहा जाता हैं। इन्हें पंच केदार में दूसरा माना जाता है। यह ऊषीमठ से 18 मील दूरी पर है। यहां महिषरूपधारी भगवान शिव की नाभि लिंग रूप में स्थित है। पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान शिव ने अपनी मधुचंद्र रात्रि यही पर मनाई थी। यहां के जल की कुछ बूंदे ही मोक्ष के लिए पर्याप्त मानी जाती है।

3.तुंगनाथ-tungnath-temple

इसे पंच केदार का तीसरा माना जाता हैं। केदारनाथ के बद्रीनाथ जाते समय रास्ते में यह क्षेत्र पड़ता है। यहां पर भगवान शिव की भुजा शिला रूप में स्थित है। कहा जाता है कि इस मंदिर का निर्माण भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए स्वयं पांडवों ने करवाया था। तुंगनाथ शिखर की चढ़ाई उत्तराखंड की यात्रा की सबसे ऊंची चढ़ाई मानी जाती है।


4.
रुद्रनाथ-

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यह पंच केदार में चौथे हैं। यहां पर महिषरूपधारी भगवान शिव का मुख स्थित हैं। तुंगनाथ से रुद्रनाथ-शिखर दिखाई देता है पर यह एक गुफा में स्थित होने के कारण यहां पहुंचने का मार्ग बेदह दुर्गम है। यहां पंहुचने का एक रास्ता हेलंग (कुम्हारचट्टी) से भी होकर जाता है।

 

5.कल्पेश्वर-5__kalpeshwar-temple

यह पंच केदार का पांचवा क्षेत्र कहा जाता है। यहां पर महिषरूपधारी भगवान शिव की जटाओं की पूजा की जाती है। अलखनन्दा पुल से 6 मील पार जाने पर यह स्थान आता है। इस स्थान को उसगम के नाम से भी जाना जाता है। यहां के गर्भगृह का रास्ता एक प्राकृतिक गुफा से होकर जाता है।