शास्त्रों के अनुसार जिस दिन गंगा पृथ्वी पर आयी थी उस दिन जेष्ठ शुक्ल दशमी तिथि थी। इसलिए हर वर्ष जेष्ठ शुक्ल दशमी तिथि को गंगा दशहरा पर्व मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन गंगा स्नान करके दान-पुण्य करने से कई गुणा अधिक पुण्य प्राप्त होता है।

इस दिन गंगा स्नान करने से छल, कपट, लोभ, परनिंदा, बुरे विचार के कारण लगने वाले दोष समाप्त होते हैं। अवैध संबंध, अकारण जीवों को कष्ट पहुंचाने एवं असत्य बचन बोलने से जो पाप लगता है वह पाप भी गंगा स्नान से धुल जाता है।

भगवान शिव ने पृथ्वी की रक्षा के लिए गंगा को अपनी जटाओं में बांध लिया और गंगा की एक धारा को पृथ्वी पर उतार दिया। शास्त्रों कहा गया है कि भगवान विष्णु के चरणों से निकली और शिव की जटाओं में लिपटी गंगा के जल में डुबकी लगाने मात्र से विष्णु और शिव का आशीर्वाद एक साथ प्राप्त हो जाता है।

 जो लोग गंगा स्नान नहीं कर सकते हैं वह अपने घर में ही बाल्टी में जल भरकर उसमें थोड़ा गंगा जल मिलाकर गंगा माता का स्मरण करते हुए स्नान करें। इससे भी गंगा स्नान का पुण्य प्राप्त कर सकते हैं।

पवित्र एवं पावन गंगाजल उचित मुल्य पर घर बेठे प्राप्त ही करने के लिये सम्पर्क् करें।

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